कि इश्क है तुमसे सिर्फ इतना बताना है…

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कि इश्क है तुमसे सिर्फ इतना बताना है, ये चोट नयी है लेकिन घाव पुराना है।

चन्द दिन ही गुजरें हैं, बिछड़े तुमसे, लग यूं रहा है, कि गुजरा जमाना है।

फुरसतों की अगर बात करुं, तो तुम शामिल हो हर वक्त में,

हम बात करतें है, खुदी से अक्सर होशो हवासों में ।

तुम्हारी यादों में इतना लिख पाना, महज लफ्जों का पैमाना है,

कि इश्क है, तुमसे सिर्फ इतना बताना है।

पहली और आखिरी ख्वाहिशों का मुझे पता नहीं, एक तमन्ना ये है,

कि तुम्हारी बाँहों में आना है, और सुकून पाना है।

मशरुफ होगें लोग बेशक तुम्हारी कशिश में बहुत,

मेरी तलब तुम्हें निहारना है, और निहारते ही चले जाना है।

कि इश्क है, तुमसे सिर्फ इतना बताना है।

नादान नहीं हूँ मैं, बस खुद को समझाना है, इस दिल को नहीं पता कि दिल कहाँ लगाना है।

कि इश्क है तुमसे सिर्फ इतना बताना है।

सौ बार तलाश लिया खुद को, अब तुम मुझमें ही शामिल हो और मुझ ही में जिन्दा हो,

कि खुशी अब इन्ही लम्हों में है, तुम्हारे साथ जीना है और तुम्हारे साथ ही चले जाना है।

जो है बेेहद है, तुमसे सिर्फ इतना बताना है।

दुनिया में आने की वाजिब वजह तो नहीं मेरे पास,

तुम्हारे कारवां में शामिल होकर खुद को तराशना है।

बेहद इश्क है, तुमसे सिर्फ इतना बताना है।

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